उत्तराखंड के काठगोदाम क्षेत्र से मजदूरों के साथ अमानवीय व्यवहार का गंभीर मामला सामने आया है। बताया जा रहा है कि लखीमपुर खीरी जिले के गोला तहसील के मैलानी क्षेत्र के कुरियानी गांव के पांच मजदूरों को एक ठेकेदार द्वारा बंधक बनाने और उनके साथ मारपीट व यातना देने का आरोप है।
मारपीट और अमानवीय यातना का आरोप
लखीमपुर खीरी के पांच मजदूरों को उत्तराखंड में काम दिलाने के बहाने ले जाया गया, जहां ठेकेदार ने कथित रूप से उन्हें बंधक बना लिया। मजदूरों से जबरन काम कराया जा रहा था और बाहर जाने की अनुमति नहीं दी जा रही थी।परिजनों का आरोप है कि ठेकेदार मजदूरों के साथ मारपीट करता था, उन्हें शारीरिक व मानसिक यातनाएं दी गईं और मजदूरी भी नहीं दी गई।
पीड़ित मजदूर सतनाम, विनीत कुमार, संदीप कुमार, हरिद्वारी और अरुण कुमार पिछले तीन महीनों से काठगोदाम स्थित मल्ला पुलिस चौकी क्षेत्र में ठेकेदार विक्की अंसारी के यहां मजदूरी कर रहे थे। परिजनों के अनुसार, तीन महीने की मजदूरी मांगने पर ठेकेदार ने मजदूरों पर चोरी का झूठा आरोप लगाकर उन्हें अपने घर में बंद कर लिया। आरोप है कि बीते सात दिनों से सभी मजदूर कैद हैं और उनके साथ लगातार मारपीट की जा रही है, साथ ही करंट लगाने की भी बात कही गई है।
परिजनों की सीएम योगी से गुहारम
जदूरों के परिजनों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से हस्तक्षेप की मांग करते हुए मजदूरों की सुरक्षित रिहाई और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की अपील की है।परिजनों का कहना है कि मजदूरों को बाहर निकलने या किसी से संपर्क करने नहीं दिया जा रहा है। एक मजदूर की बहन नीतू ने बताया कि जब वह अपने भाई को छुड़ाने काठगोदाम पहुंची तो उसे भी कुछ समय के लिए बंधक बना लिया गया था।
गांव की महिलाओं ने स्थानीय पुलिस पर मामले में उदासीनता बरतने का आरोप लगाया है।ग्रामीणों के मुताबिक, काठगोदाम की मल्ला पुलिस चौकी में शिकायत दर्ज कराने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। पुलिस पर दबंग ठेकेदार के रसूखदार होने की बात कहकर मामले को टालने का आरोप लगाया गया है।
प्रशासन से त्वरित कार्रवाई की मांग
परिजनों और स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कर मजदूरों को जल्द मुक्त कराने और कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है।मामले की गंभीरता को देखते हुए, पीड़ित परिवारों और गांव के लोगों ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से हस्तक्षेप की मांग की है।
उनकी गुहार है कि उत्तराखंड में कैद मजदूरों को सुरक्षित छुड़ाया जाए और दोषी ठेकेदार के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।इस तरह की घटनाये रोजगार की तलाश में बाहर गए मजदूरों की सुरक्षा और उनके अधिकारों पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
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