Lakhimpur Kheri News : शारदानगर में बाढ़ पीड़ितों की बस्ती में लगी भीषण आग, 18 घर राख में तब्दील

थाना शारदानगर क्षेत्र में सड़क किनारे बसी बाढ़ पीड़ितों की बस्ती में अचानक आग लग गई, जिससे 18 घर जलकर राख हो गए। यह हादसा खाना बनाते समय हुआ, जब तेज हवा के कारण आग तेजी से फैल गई। पीड़ित परिवारों का लाखों का नुकसान हुआ है।

कैसे हुआ हादसा?

शारदानगर-ढखेरवा रोड पर बसे बाढ़ पीड़ित परिवार शारदा बैराज के पास झोपड़ी बनाकर रह रहे थे। यह परिवार 18 साल पहले शारदा नदी की बाढ़ में अपने घर और खेत गंवा चुके हैं। परमेश्वर गौतम, जो इस बस्ती में रहते हैं, ने बताया कि खाना बनाते समय आग की चिंगारी हवा के झोंके से झोपड़ी में फैल गई। कुछ ही मिनटों में आग ने पूरी बस्ती को अपनी चपेट में ले लिया।

लाखों का नुकसान

इस अग्निकांड में पीड़ित परिवारों का सारा सामान जलकर राख हो गया।

  • परमेश्वर गौतम: 10,000 रुपये का सामान जल गया।
  • नरेश गौतम: 5,000 रुपये का नुकसान।
  • मिश्रीलाल: 8,000 रुपये का सामान जलकर नष्ट।
  • पंकज गौतम: 10,000 रुपये का मोबाइल और अन्य सामान राख हो गया।
  • जय राम सिंह: 20,000 रुपये नकद और जेवर जल गए।
  • अंकित सिंह: 15,000 रुपये का नुकसान।
  • शिवपूजन और शिवचंद्र सिंह: दोनों के 10,000-15,000 रुपये का नुकसान हुआ।

प्रशासन ने किया मुआयना

अग्निकांड की सूचना मिलते ही प्रशासन और पुलिस की टीम मौके पर पहुंची। अधिकारियों ने प्रभावित परिवारों से बातचीत की और आग से हुए नुकसान का आकलन शुरू कर दिया है। प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि सभी पीड़ितों को उचित मुआवजा दिया जाएगा।

बाढ़ पीड़ितों की दुर्दशा

यह परिवार गंगोलिया पोस्ट बजहा तहसील धौरहरा के रहने वाले हैं। 18 साल पहले आई बाढ़ ने इनके घर और जमीन छीन ली थी। इसके बाद से ये परिवार सड़क किनारे झोपड़ी बनाकर गुजर-बसर कर रहे थे। लेकिन अब आग ने उनका अंतिम सहारा भी छीन लिया।

पीड़ितों की अपील

इस हादसे के बाद पीड़ित परिवार बेहद दुखी और हताश हैं। उनका कहना है कि बाढ़ और आग ने उनकी जिंदगी तबाह कर दी है। प्रशासन से जल्द से जल्द राहत और पुनर्वास की मांग की गई है।

आगे क्या होगा?

प्रशासन द्वारा नुकसान का आकलन पूरा होने के बाद मुआवजे का वितरण किया जाएगा। साथ ही, पीड़ितों को अस्थायी रूप से रहने की व्यवस्था और खाद्य सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी।

यह घटना एक बार फिर बाढ़ पीड़ितों की समस्याओं और उनकी अनदेखी की ओर इशारा करती है। सरकार और प्रशासन को उनके स्थायी पुनर्वास के लिए गंभीर प्रयास करने की जरूरत है।

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