Lakhimpur Kheri News: लखीमपुर में शारदा नदी का प्रकोप, बझेड़ा गांव में कटान से तबाही कई खेत समाए नदी में

लखीमपुर खीरी में शारदा नदी उफान पर है, नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ने से बझेड़ा गांव में कटान तेज हो गई है, अब तक कई किसानों की फसलें और खेत नदी में समा चुके हैं, हालात यह हैं कि गांव के कई मकान भी खतरे की जद में आ गए हैं, ग्रामीण प्रशासन से मदद की गुहार लगा रहे हैं, लेकिन राहत कार्य धीमी गति से चल रहे हैं।

शारदा नदी में तेज कटान से तबाही

लखीमपुर खीरी में शारदा नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है, बाढ़ के चलते नदी किनारे बसे गांवों में कटान तेज हो गई है। बझेड़ा गांव में कई बीघा कृषि भूमि नदी में समा चुकी है, जिससे किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है,गांव के आसपास करीब चार से पांच किलोमीटर से अधिक की जमीन कटकर फसल बर्बाद हो चुकी है, गांव के मुख्य मार्ग को छोड़कर बाकी अन्य रास्तों पर लोगों द्वारा आने जाने के लिए नाव का इस्तेमाल किया जा रहा हैं।

दो साल पहले प्रशासन ने गांव को बाढ़ और कटान से बचाने के लिए सवा छह करोड़ रुपये की लागत से 700 मीटर लंबा बंधा बनाया था, परन्तु शारदा नदी की उफनती लहरों ने इस परियोजना के 60 मीटर हिस्से को लील लिया। लोगों का कहना है कि इस साल प्रशासन द्वारा बाढ़ कटान को रोकने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए, जिसके चलते बंधा कमजोर पड़ गया और पानी गांव में घुसने लगा, इसके चलते मुख्य मार्ग अभी तक बचा हुआ है।

बझेड़ा गांव पर मंडराया खतरा,फसलें डूबीं, चारा भी खत्म, भूख का संकट

बझेड़ा गांव की कई एकड़ फसलें पानी में डूब चुकी हैं। खेतों में खड़ी धान, गन्ना और सब्जियां अब केवल कीचड़ और पानी के नीचे दफन कई किसान अब पूरी तरह बर्बाद हो चुके हैं। आर्थिक संकट के कारण ग्रामीणों की परेशानी और बढ़ गई है, इसके साथ ही ग्रामीणों के पास अपने पशुओं को खिलाने के लिए चारा और भूसा तक नहीं बचा, जिनके पास कुछ चारा है, वे ऊंचे स्थानों पर जाकर उसे काटने को मजबूर हैं।

गांव के कुछ ग्रामीण बताते हैं कि हमारी सारी फसल बर्बाद हो गई, यहा तक कि पशुओं को लिखने के लिए कुछ नहीं बचा, अब तो पशुओं के साथ साथ हमारे भी भूखे मरने की नौबत आ रही है।

ग्रामीणों की गुहार,जल्द हो स्थायी समाधान

प्रशासनिक कार्य को लेकर ग्रामीणों में आक्रोश देखने को मिल रहा हैं, ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन ने समय रहते बाढ़ के कटान को रोकने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए हैं, सवा छह करोड़ की परियोजना को गांव की रक्षा के लिए बनाया गया था, जो कि अब पानी की भेंट चढ़ चुकी है।

अगर प्रशासन अब भी नहीं चेता तो दो-चार दिन में हालात और खराब हो जाएंगे, मकानों का कटना शुरू हो जाएगा, हमारा गांव पूरी तरह डूब जाएगा। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि कटान रोकने के लिए ठोस उपाय किए जाएं, गांव को बचाने के लिए पक्का बांध बनाया जाए ताकि हर साल इसी तरह की आपदा से बचा जा सके।

नाव से पहुंचे अधिकारी, राहत कार्यों को देखा

रिमझिम बारिश के बीच मंगलवार को एडीएम नरेंद्र बहादुर सिंह ने बाढ़ प्रभावित गांवों का निरीक्षण किया, एसडीएम राजीव कुमार निगम के साथ वेनाव से लालबोझी गांव पहुंचे, चारों ओर फैले जलभराव के बीच हालातों का जायजा लिया, इसके अलावा एडीएम ने पीड़ितों को लंच के पैकेट वितरण करने के निर्देश दिए।

गांव की आशा बहू से कहा कि गर्भवती महिलाओं को आवश्यक दवाएं और आहार प्रदान करे, पशु चिकित्सा विभाग की टीम को सक्रिय करते हुए बाढ़ प्रभावित इलाकों में पशुओं के टीकाकरण व देखरेख की व्यवस्था करने के लिए के साथ ही लेखपालों को अपने-अपने क्षेत्रों में निगरानी बनाए रखने के लिए कहा। एडीएम ने रामाधीन इंटर कॉलेज बम्बनपुर स्थित बाढ़ आश्रय केंद्र पहुंचे और ठहरे लोगों से बातचीत की, लालबोझी में 300 परिवारों को लंच के पैकेट बांटे।

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