गोला गोकर्णनाथ में निर्माणाधीन शिव मंदिर कॉरिडोर में परिक्रमा पथ निर्माण के लिए नींव की खोदाई हो रही है। खोदाई में जुटे लोग सोमवार को उस वक्त हैरत में पड़ गए, जब उन्हें जमीन से करीब छह फीट की गहराई में सुरंगनुमा आकृति दिखी।
क्या मिला ‑विश्वसनीय तथ्य
लखीमपुर खीरी के गोला गोकर्णनाथ में निर्माणाधीन शिव मंदिर कॉरिडोर परियोजना के तहत परिक्रमा पथ के लिए की जा रही नींव की खुदाई के दौरान एक रहस्यमयी सुरंगनुमा संरचना सामने आई है।सोमवार को खोदाई के दौरान धरातल से करीब छह फीट गहराई में गोलाकार आकृति में सुरंगनुमा अवशेष मिले हैं। जानकारी होने पर इसे देखने के लिए आसपास के लोग आने जाने लगे। कुछ ही देर में सुरंग मिलने की चर्चा आम जनमानस और सोशल मीडिया पर फोटो और वीडियो के साथ वायरल होने लगी।
परियोजना के अंतर्गत मंदिर परिसर का कायाकल्प किया जा रहा है, जिसमें परिक्रमा पथ, सरोवर, मुख्य द्वार और अन्य धार्मिक संरचनाओं का निर्माण शामिल है। इसी सिलसिले में खुदाई के दौरान मजदूरों को ज़मीन के नीचे एक सुरंग जैसी संरचना मिली, जिसकी लंबाई और दिशा स्पष्ट नहीं हो पाई है।
लोगों में उत्सुकता, प्रशासन सतर्क
स्थानीय लोगों के अनुसार, यह सुरंग काफी पुरानी लग रही है और पत्थरों से बनी हुई है। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि यह कोई प्राचीन सुरंग, जल निकासी मार्ग, या कोई पुरानी संरचना का हिस्सा है।इस घटना के बाद मौके पर भीड़ जुटने लगी, जिससे स्थानीय प्रशासन ने सुरक्षा की दृष्टि से क्षेत्र को सील कर दिया है। पुरातत्व विभाग को भी सूचना दी गई है और जांच की प्रक्रिया प्रारंभ होने की उम्मीद है।
शिव मंदिर कमेटी अध्यक्ष जनार्दन गिरि के अनुसार
सुरंग देखते ही इसकी जानकारी शिव मंदिर कमेटी अध्यक्ष जनार्दन गिरि को दी गई उन्होंने बताया कि उन्होंने अपने बचपन में देखा है कि तीर्थ कुंड में एक ओर से अल्पिका नहर के माध्यम से जल भरने की व्यवस्था और दूसरी ओर से तीर्थ के गंदे जल निकालने की व्यवस्था थी। हो सकता है कि तीर्थ कुंड में जल भरने के लिए नहर से तीर्थ तक पुराने नाले के अवशेष हों।
लेकिन सुरंग होने का कोई औचित्य नहीं है। वहीं कार्यदायी संस्था यूपीपीसीएल के जेई नितिन सिंह ने बताया कि जानकारी उच्च अधिकारियों को दे दी गई है। इस मामले में मंदिर कमेटी अध्यक्ष और अन्य लोगों से भी बात चित की गई और जानकारी की गई है।




