Lakhimpur Kheri News: अगर मांगे नहीं मानी गईं, तो डिप्लोमा फार्मासिस्ट असोसिएशन करेगी आंदोलन

Lakhimpur Kheri News: डिप्लोमा फार्मासिस्ट एसोसिएशन जनपद शाखा खीरी ने जिला मुख्यालय पर एक दिवसीय धरना देकर अपनी 24 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन मुख्यमंत्री को संबोधित करते हुए सौंपा। एसोसिएशन ने साफ किया कि अगर उनकी मांगे पूरी नहीं हुईं, तो वे व्यापक स्तर पर आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।

ज्ञापन में क्या थीं मुख्य मांगें?

एसोसिएशन ने ज्ञापन में स्पष्ट किया कि फार्मासिस्टों को लंबे समय से अपनी मांगों के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। उनकी 24 सूत्रीय मांगों में प्रमुख बिंदु हैं:

  • पदोन्नति प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए।
  • फार्मासिस्टों के अधिकारों को संरक्षित करने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं।
  • सेवा शर्तों में सुधार किया जाए ताकि फार्मासिस्ट समुदाय को उनके योगदान का उचित सम्मान मिले।
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धरने में अधिकारियों की भागीदारी

धरने के दौरान फार्मासिस्ट संघ के अधिकारियों ने अपने विचार साझा किए। संघ के सदस्यों ने आरोप लगाया कि शासन और प्रशासन उनकी मांगों को लगातार नजरअंदाज कर रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि सरकार सकारात्मक निर्णय नहीं लेती, तो वे आंदोलन के लिए तैयार हैं।

प्रशासन पर क्या आरोप लगाए गए?

डिप्लोमा फार्मासिस्ट एसोसिएशन ने कहा कि शासन और प्रशासन उनकी समस्याओं को गंभीरता से नहीं ले रहा है। इस वजह से फार्मासिस्ट समुदाय को मानसिक और पेशेवर कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, तो आंदोलन के अगले चरण में राज्यव्यापी हड़ताल का आयोजन किया जाएगा।

आंदोलन की रणनीति

धरने के दौरान एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. संजीव गुप्ता ने कहा कि फार्मासिस्ट समुदाय अब चुप नहीं बैठेगा। उन्होंने बताया कि उनकी मांगें पूरी न होने पर वे सरकार के खिलाफ चरणबद्ध आंदोलन करेंगे। इसके तहत रैलियां, ज्ञापन और विरोध प्रदर्शन का आयोजन किया जाएगा।

समाधान का सुझाव

एसोसिएशन के सदस्यों ने बताया कि फार्मासिस्टों की समस्याओं को हल करने के लिए सरकार को तुरंत प्रभावी कदम उठाने चाहिए। साथ ही, फार्मासिस्टों की पदोन्नति और सेवा शर्तों में सुधार के लिए ठोस नीतियां बनाई जानी चाहिए।

निष्कर्ष

डिप्लोमा फार्मासिस्ट एसोसिएशन के इस आंदोलन ने फार्मासिस्ट समुदाय की नाराजगी और उनकी समस्याओं को उजागर किया है। अगर शासन ने उनकी मांगों पर जल्द ही कोई निर्णय नहीं लिया, तो यह आंदोलन बड़े पैमाने पर उभर सकता है। सरकार को इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए फार्मासिस्टों के हितों को सुरक्षित करना चाहिए।

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