लखीमपुर खीरी के गोला गोकर्णनाथ में सोमवार को सेन्ट्रल बार एसोसिएशन ने पलिया में हुई घटना को लेकर अधिवक्ताओं ने तहसील परिसर में प्रदर्शन करते हुए प्रशासन को ज्ञापन सौंपा। अधिवक्ताओं का आरोप है कि लेखपाल की गलती के बावजूद उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई, जबकि विरोध करने वाले वकीलों पर ही मुकदमा दर्ज कर दिया गया।
लेखपाल पर कार्रवाई की मांग
अधिवक्ताओं के अनुसार, कुछ दिन पहले रात में तहसील परिसर से लेखपाल रजनीश सिंह और उनके मुंशी अली मुस्ताक को बिक्री के लिए ले जाए जा रहे पांच गांठ कंबलों के साथ पकड़ा गया था। पलिया बार एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रदीप कुमार मेनरो ने इस पर आपत्ति दर्ज कराई थी।गलती के बावजूद उस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई, जबकि विरोध करने वाले वकीलों पर ही मुकदमा दर्ज कर दिया गया।इसके साथ ही अधिवक्ताओं ने आरोप लगाया है कि लेखपाल पर आपत्ति जताने के बाद उन्हें धमकी दी गई थी। की इस मामले की शिकायत यदि उपजिलाधिकारी से की गई, लेकिन उन्होंने लेखपाल का पक्ष लेते हुए कोई कार्रवाई नहीं की।
अधिवक्ताओं ने यह भी आरोप लगाया कि उपजिलाधिकारी ने अधिवक्ता संघ अध्यक्ष के साथ अनुचित व्यवहार किया और उन पर शराब पीने का आरोप लगाकर उनकी सार्वजनिक छवि खराब करने का प्रयास किया।अधिवक्ताओं ने कहा कि पलिया की घटना में लेखपाल की भूमिका संदिग्ध है। इसके बावजूद प्रशासन ने उसे बचाने का प्रयास किया और निष्पक्ष जांच नहीं कराई। उन्होंने मांग की कि दोषी लेखपाल के खिलाफ तत्काल विभागीय कार्रवाई की जाए।
वकीलों पर मुकदमा दर्ज करने का विरोध
अधिवक्ताओं ने पलिया के उपजिलाधिकारी की कार्रवाई की निंदा की। उन्होंने आरोप लगाया कि न्याय की मांग करने वाले अधिवक्ताओं पर ही मुकदमा दर्ज कर दिया गया, जो कि पूरी तरह गलत और अन्यायपूर्ण है। उन्होंने कहा कि लेखपाल पर कार्रवाई करने के बजाय अधिवक्ताओं के खिलाफ दुर्भावनापूर्ण तरीके से फर्जी मुकदमा दर्ज किया गया है।
बता दे कि बैठक के बाद सर्वसम्मति से चार प्रस्ताव पारित किए गए। पहले प्रस्ताव में पलिया तहसील बार अध्यक्ष और अन्य अधिवक्ताओं के विरुद्ध दर्ज फर्जी एफआईआर को तत्काल रद्द करने की मांग की गई है । वही दूसरे प्रस्ताव में पलिया बार अध्यक्ष की शिकायत के आधार पर दोषी उपजिलाधिकारी पलिया और अन्य संबंधित कर्मचारियों के विरुद्ध तत्काल एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई।
आंदोलन तेज करने की चेतावनी
बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही निष्पक्ष जांच और कार्रवाई नहीं की गई, तो अधिवक्ता आंदोलन को और उग्र रूप देंगे।और तीसरे प्रस्ताव में एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने सख्त चेतावनी दी गई है कि यदि अधिवक्ताओं के विरुद्ध दर्ज फर्जी एफआईआर की जल्द ही कार्रवाई और वकीलों पर दर्ज मुकदमा वापस नहीं लिया गया तो अधिवक्ता आंदोलन को और तेज करेंगे।
जिसकी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। चौथे प्रस्ताव के तहत, इस घटना के विरोध में सेन्ट्रल बार एसोसिएशन गोला के सभी अधिवक्ता सोमवार को सामूहिक अवकाश पर रहे।सेन्ट्रल बार एसोसिएशन गोला की ओर से जिलाधिकारी लखीमपुर खीरी को संबोधित यह ज्ञापन उपजिलाधिकारी गोला के माध्यम से भेजा गया है।




