लखीमपुर खीरी में भारतीय किसान यूनियन (अम्बावता) के कार्यकर्ताओं ने कलेक्ट्रेट पर पहुंचकर गन्ना किसानों की समस्याओं को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। बड़ी संख्या में किसान शामिल हुए और उन्होंने सरकार व प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताई।
कलेक्ट्रेट में भाकियू (अम्बावता) का जोरदार प्रदर्शन
लखीमपुर खीरी में भाकियू (अम्बावता) के कार्यकर्ताओं ने कलेक्ट्रेट पहुँचकर गन्ना किसानों की समस्याओं को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। बड़ी संख्या में किसान हाथों में तख्तियां और बैनर लेकर पहुँचे। लखीमपुर खीरी में शुक्रवार, 5 दिसंबर 2025 को भारतीय किसान यूनियन (अम्बावता) के बैनर तले बड़ी संख्या में गन्ना किसान कलेक्ट्रेट परिसर में धरने पर बैठ गए।
किसानों ने चीनी मिलों द्वारा बकाया गन्ना मूल्य का भुगतान न करने, घटतौली, अवैध धन वसूली और मिल अधिकारियों की मनमानी के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के बाद किसानों ने अपनी पांच सूत्रीय मांगों से संबंधित एक ज्ञापन सदर तहसीलदार को सौंपा, जिसे जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश को भेजा जाएगा।
गन्ना भुगतान में देरी और घटतौली पर जताई नाराजगी
किसानों ने आरोप लगाया कि चीनी मिलों द्वारा लंबे समय से गन्ना भुगतान लंबित है, जिससे किसानों को आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है।इसके साथ ही उन्होंने मिलों पर गन्ना तौल में घटतौली के गंभीर आरोप लगाए।ज्ञापन में किसानों ने आरोप लगाया कि बजाज समूह सहित कई चीनी मिलें न तो पिछले सत्र का बकाया भुगतान कर रही हैं और न ही चालू सत्र की रकम समय पर दे रही हैं।
इससे किसानों की आजीविका प्रभावित हो रही है। उन्होंने मांग की कि सरकार इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करे।किसानों की दूसरी प्रमुख शिकायत घटतौली को लेकर थी। उन्होंने आरोप लगाया कि गन्ना विभाग की सरकारी मशीनरी और मिल प्रबंधन की मिलीभगत से यह अनियमितता लगातार जारी है। किसानों ने मांग की कि घटतौली पर सख्त रोक लगाई जाए और दोषी गन्ना अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।
प्रशासन को सौंपा ज्ञापन
भाकियू (अम्बावता) के पदाधिकारियों ने एसडीएम/जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर मांग की कि,उन्होंने मांग की है,लंबित गन्ना भुगतान तुरंत किया जाए, साथ ही घटतौली करने वाले कर्मचारियों और मिल प्रबंधन पर सख्त कार्रवाई की जाए, किसानों की समस्याओं के निस्तारण के लिए समयबद्ध व्यवस्था बनाई जाएसाथ ही किसानों ने यह भी मांग की कि जिस प्रकार तौल लिपिकों का पाक्षिक स्थानांतरण होता है।
उसी तरह चीनी मिलों के गन्ना अधिकारियों का भी नियमित स्थानांतरण अनिवार्य किया जाए जिससे भ्रष्टाचार पर अंकुश लग सके। इसके अतिरिक्त, गन्ना केंद्रों पर उतराई शुल्क के नाम पर होने वाली अवैध वसूली को रोका जाए, जो समिति सचिवों और वरिष्ठ गन्ना निरीक्षकों की मिलीभगत से होती है।
जल्द कार्रवाई न होने पर आंदोलन तेज करने की चेतावनी
किसान नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि समय रहते समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, तो संगठन बड़ा आंदोलन शुरू करेगा।उन्होंने कहा कि अगली बार पूरे जिले के किसानों को कलेक्ट्रेट घेराव के लिए बुलाया जाएगा।ज्ञापन में यह भी मांग शामिल थी कि यदि बजाज समूह गन्ना मूल्य का भुगतान करने में अक्षम है, तो किसानों का गन्ना अन्य सक्षम चीनी मिलों में डायवर्ट किया जाए।
भारतीय किसान यूनियन के जिला अध्यक्ष महादेव प्रसाद वर्मा ने चेतावनी दी कि यदि इन समस्याओं का समयबद्ध समाधान नहीं हुआ, तो संगठन आंदोलनात्मक कदम उठाने को मजबूर होगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।इस मौके पर किसान गिरजा दयाल, रामचंद्र, द्वारिका प्रसाद, दाताराम सहित तमाम किसान मौजूद रहे।




