गोला गोकर्णनाथ, शिव मंदिर कॉरिडोर निर्माण में ध्वस्तीकरण के दौरान नजूल भूमि को लेकर लोग असमंजस में हैं, लोगो द्वारा दिखाए जा रहे दस्तावेजों को प्रशासन द्वारा नकार जा रहा है, तमाम भाग दौड़ के बावजूद भी प्रभावितों को राहत मिलने की कोई भी आशंका नजर नहीं आ रही है,
सूत्रों के अनुसार नजूल भूमि
मिली हुई जानकारी के अनुसार गोला शहर में लगभग 20.506 हेक्टेयर यानी 2,05,060 वर्ग मीटर भूमि नजूल की है,जिस पर नगर पालिका परिषद अस्पताल, रेलवे स्टेशन सहित सरकारी भवन एवं निजी भवन भी बने हुए हैं, कारिडोर निर्माण के लिए जैसे ही सरकार द्वारा ध्वस्तीकरण की कार्रवाई चली तो प्रशासन ने नजूल की भूमि का दर्शाया जाना लोगों के लिए केवल सर दर्द ही नहीं बल्कि बहुत बड़ी चिंता का कारण बन गया, लोग अपनी अपनी जमीन के दस्तावेज दिखाते रह गए प्रशासन ने निर्माण ढहा दिए।

आखिर नजूल भूमि है क्या
मिली विभागीय जानकारी अनुसार भारत में आजादी के बाद जिन जमीनों को अंग्रेजों से कब्जा मुक्त कराया गया था, उन पर तत्कालीन राजाओं और राजघरानों के पास स्वामित्व साबित करने के लिए उचित दस्तावेज नहीं थे, इसलिए इन जमीनों को नजूल के रूप में चिह्नित करते हुए सरकार ने अपने कब्जे में ले लिया था,इसके साथ ही इन जमीनों पर सरकार का स्वामित्व हो गया, इसलिए इन जमीनों की रजिस्ट्री के लिए पंजीयन विभाग की ओर से खसरा जारी नहीं है।
नजूल भूमि का कस्टोडियन
जानकारी के मुताबिक नजूल की भूमि की कस्टोडियन सरकार की होती है, इसलिए नजूल की भूमि पर कराया गया बैनामा अवैध माना जाएगा, या जब तक सरकार ने भूमि को फ्री होल्ड न किया हो, नजूल की भूमि पर बने निर्माण को ही ढहाया गया है।




