लखीमपुर खीरी में गुरुवार को कलक्ट्रेट सभागार में प्रभारी मंत्री नितिन अग्रवाल जिला योजना की बैठक ले रहे थे। इस दौरान स्वयं सहायता समूह की बड़ी संख्या में महिलाएं वहां पहुंच गईं। महिलाएं अपने बकाया भुगतान, अधिकारियों की मनमानी और अन्य समस्याओं को लेकर हंगामा करने लगीं। उन्होंने प्रभारी मंत्री को घेरने की कोशिश की।
डीएम ने दिया आश्वासन
महिलाओं के हंगामे को देखते हुए डीएम दुर्गा शक्ति नागपाल बैठक छोड़कर बाहर आईं। उन्होंने महिलाओं को भरोसा दिलाया कि उनकी समस्याओं का समाधान 15 तारीख तक कर दिया जाएगा। डीएम के इस आश्वासन पर महिलाएं शांत हो गईं। हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि अगर उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं, तो वे 10 दिन बाद फिर प्रदर्शन करेंगी।
समस्याओं को किया नोट
डीएम से बातचीत के बाद डीसी एनआरएलएम जितेंद्र मिश्रा ने समूह की महिलाओं से व्यक्तिगत रूप से बात की। उन्होंने उनकी समस्याओं को नोट किया और जल्द समाधान का आश्वासन दिया।
क्या हैं महिलाओं की शिकायतें?
स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने बताया कि ब्लॉक स्तर पर तैनात बीएमएम (ब्लॉक मिशन मैनेजर) मनमानी करते हैं। बिना सुविधा शुल्क दिए कोई काम नहीं होता।
- मानदेय की समस्या:
समूह सखी का प्रतिमाह 1,000 रुपये मानदेय है, लेकिन यह लंबे समय से नहीं मिला।
बैंक सखी का 4,000 रुपये मानदेय तय था, जो अब नहीं दिया जा रहा है।
जिले में तैनात 118 वित्तीय साक्षरता कैडर (एफएलसीआरपी) को ट्रेनिंग के लिए प्रतिदिन 266 रुपये दिए जाने थे, लेकिन उनका भुगतान भी अटका है। - पैसा लेकर हुआ चयन:
निघासन के सिंगहा खुर्द गांव की निवासी अमीषा देवी ने बताया कि उन्होंने बैंक सखी बनने के लिए आवेदन दिया था। लेकिन बीएमएम ने पैसे लेकर दूसरी महिला का चयन कर लिया। अमीषा ने इसका विरोध किया तो उन्हें धमकी दी गई।

बिना पैसा कैसे करें काम?
महिलाओं ने सरकार पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार महिलाओं को रोजगार के मौके दे रही है, लेकिन जिलास्तर पर उनकी उपेक्षा हो रही है।
महिलाओं ने कहा, “हमें काम दिया जाता है, लेकिन भुगतान नहीं मिलता। आखिर बिना मानदेय के काम कैसे करें? चार पैसे कमाने के लिए हमने इस क्षेत्र में कदम रखा, लेकिन जब पैसा ही नहीं मिलेगा, तो इस काम का क्या मतलब?”
आगे की योजना
महिलाओं ने साफ कर दिया है कि अगर उनकी मांगों को गंभीरता से नहीं लिया गया और समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, तो वे अफसरों के खिलाफ बड़े स्तर पर प्रदर्शन करेंगी।
निष्कर्ष
स्वयं सहायता समूह की महिलाओं का प्रदर्शन दिखाता है कि स्थानीय स्तर पर सरकारी योजनाओं का सही तरीके से क्रियान्वयन नहीं हो रहा है। यह जरूरी है कि अधिकारियों की जवाबदेही तय हो और महिलाओं की समस्याओं का जल्द समाधान किया जाए।




